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भजन-संहिता 142

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1 मेंह यहोवा ला ऊंचहा अवाज म पुकारथंव; मेंह यहोवा ला दया करे बर जोर से गोहारथंव। 2 मेंह ओकर आघू म अपन सिकायत ला खुलके बताथंव; ओकर आघू म मेंह अपन समस्या ला बताथंव। 3 जब मोर आतमा ह मोर भीतरे-भीतर बियाकुल होथे, तब तेंहीच ह मोर दसा ला देखथस। जऊन रसता म मेंह चलथंव, ओ रसता म मनखेमन मोर बर फंदा लगाय हवंय। 4 देख, मोर जेवनी कोति कोनो नइं एं; मोर कोनो चिंता नइं करंय। मोर कोनो सरन-स्थान नइं ए; कोनो मोर जिनगी ऊपर धियान नइं देवंय। 5 हे यहोवा, मेंह तोला पुकारत हंव; मेंह कहिथंव, “तेंह मोर सरन-स्थान, अऊ जीयत परानीमन के देस म मोर भाग अस।" 6 मोर पुकार ला सुन, काबरकि मेंह बहुंत जरूरत म हवंव; जऊन मन मोर पीछा करथें, ओमन ले मोला बचा, काबरकि ओमन मोर ले बहुंत ताकतवर अंय। 7 मोला मोर जेल ले छोंड़ा ले, ताकि मेंह तोर परसंसा करंव। तब मोर ऊपर तोर भलई के कारन धरमी मनखेमन मोर चारों कोति जूरहीं।

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