भजन-संहिता 140
TWF1 हे यहोवा, मोला दुस्ट काम करइयामन ले छुड़ा; हिंसा करइयामन ले मोला बचा, 2 जऊन मन अपन मन म दुस्ट काम करे के योजना बनाथें अऊ हर दिन लड़े बर भड़कावत रहिथें। 3 ओमन के बोलई ह सांप के काटे सहीं अय; ओमन के ओंठ म करैत सांप के जहर हवय। 4 हे यहोवा, दुस्ट मनखेमन के हांथ ले मोर रकछा कर; हिंसक मनखेमन ले मोला बचा, जऊन मन मोर पांव म चोट पहुंचाय के योजना बनाय हवंय। 5 घमंडी मनखेमन मोला फंसाय बर फांदा छुपाय हवंय; ओमन अपन जाल के डोर ला बिछाय हवंय अऊ मोर रसता म मोर बर फांदा लगाय हवंय। 6 मेंह यहोवा ले कहिथंव, “तेंह मोर परमेसर अस।” हे यहोवा, दया के मोर पुकार ला सुन। 7 हे परमपरधान यहोवा, तेंह सामर्थी छुड़ानेवाला अस, तेंह लड़ई के दिन म मोर मुड़ के ढाल बनथस। 8 हे यहोवा, दुस्टमन के ईछा ला पूरा झन कर; ओमन के योजना ला सफल झन होवन दे। 9 जऊन मन मोला चारों कोति ले घेरे हवंय अऊ घमंड से मुड़ उठाय हवंय; ओमन के मुहूं के दुस्टता के बात ओहीचमन ला खा जावय। 10 बरत कोइला ओमन ऊपर गिरय; ओमन ला आगी म झोंके जावय, ओमन चीखला ले भरे खंचवा म फटिक दिये जावंय, जिहां ले ओमन कभू उठ नइं सकंय। 11 निन्दा करइयामन देस म स्थापित झन होवंय; हिंसा करइयामन ऊपर बिपत्ति पड़य। 12 मेंह जानथंव कि यहोवा ह गरीब-दुखीमन के नियाय करथे अऊ जरूरतमंद के मामला ला संभालथे। 13 खचित धरमीमन तोर नांव के परसंसा करहीं अऊ ईमानदारमन तोर आघू म रहिहीं।
